बिना अलर्ट किए खुला बॉयलर का गेट; 1st फ्लोर से कूदकर बचाई जान:आपबीती
लखनऊ. रायबरेली के पास ऊंचाहार में स्थित NTPC प्लांट में बुधवार को बॉयलर फट गया।रायबरेली के सीएमओ केके सिंह के मुताबिक, हादसे में 20 लोगों की मौत हो गई। यूपी एडीजी लॉ एंड ऑर्डर आनंद कुमार ने बताया कि 60-70 लोग घायल हैं। लगभग 22 लोगों को लखनऊ रेफर किया गया है। श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल हॉस्पिटल पहुंचे14 । इनमें से किसी ने बताया कि इंजीनियर्स की गलती की वजह से हादसा हुआ। कोई बोला- अपनी जान फंसते देख मैंने पहली मंजिल से छलांग लगा दी।बिना एलर्ट किए खोला गया बॉयलर का गेट...
- सिविल हॉस्पिटल पहुंचे घायल राम सिंह ने बताया, ''बॉयलर का गेट धीरे-धीरे खोला जाता है, जिससे उसमें बनी गैस आसानी से निकल जाए। ब्लास्ट का खतरा भी नहीं रहता है।''
- ''यह एक रूटीन प्रक्रिया है, लेकिन आज इस बारे में बताया ही नहीं गया। इंजीनियरों ने वर्कर्स को बिना एलर्ट किए उसका ऑटोमेटिक डोर खोल दिया।''
- ''इस नए बॉयलर को बिना पूरा कम्पलीट हुए ही चला दिया गया था। साथ ही इसमें बिजली का निर्माण कार्य भी चल रहा था।''
जान बचाने के लिए 1st फ्लोर से लगाई छलांग
- सिविल हॉस्पिटल पहुंचे घायल राम सिंह ने बताया, ''बॉयलर का गेट धीरे-धीरे खोला जाता है, जिससे उसमें बनी गैस आसानी से निकल जाए। ब्लास्ट का खतरा भी नहीं रहता है।''
- ''यह एक रूटीन प्रक्रिया है, लेकिन आज इस बारे में बताया ही नहीं गया। इंजीनियरों ने वर्कर्स को बिना एलर्ट किए उसका ऑटोमेटिक डोर खोल दिया।''
- ''इस नए बॉयलर को बिना पूरा कम्पलीट हुए ही चला दिया गया था। साथ ही इसमें बिजली का निर्माण कार्य भी चल रहा था।''
जान बचाने के लिए 1st फ्लोर से लगाई छलांग
- पूरी तरह से जला हुआ सोनभद्र जिले का रहने वाला अरविंद कुमार हॉस्पिटल पहुंचा। साथ में कम जला चचेरा भाई हरिशंकर था। दोनों एनटीपीसी में काम करते हैं।
- चचेरे भाई ने बताया, ''हादसे के वक्त लगभग 250 से 300 लोग काम कर रहे थे। बॉयलर नया था इसलिए मजदूर ज्यादा लगाए गए थे।''
- ''जब वो फटा तो मैं तो दूर था, लेकिन अरविंद करीब था। इसी वजह से वो ज्यादा जल गया।''
- ''आग और धुंए से बचने के लिए मैं सीढ़ियों से ऊपर की ओर भागा, लेकिन वहां कोई रास्ता नहीं दिखा। फिर मैंने पहली मंजिल से ही बाहर छलांग लगा दी।''
- ''हॉस्पिटल आते वक्त भाई की सांसे चल रही थी, लेकिन डॉक्टर्स ने कहा उसका बचना मुश्किल है। अभी इलाज चल रहा है।''
अक्टूबर 2018 में होनी है शादी- जोड़ रहा था पैसे
- चचेरे भाई ने बताया, ''हादसे के वक्त लगभग 250 से 300 लोग काम कर रहे थे। बॉयलर नया था इसलिए मजदूर ज्यादा लगाए गए थे।''
- ''जब वो फटा तो मैं तो दूर था, लेकिन अरविंद करीब था। इसी वजह से वो ज्यादा जल गया।''
- ''आग और धुंए से बचने के लिए मैं सीढ़ियों से ऊपर की ओर भागा, लेकिन वहां कोई रास्ता नहीं दिखा। फिर मैंने पहली मंजिल से ही बाहर छलांग लगा दी।''
- ''हॉस्पिटल आते वक्त भाई की सांसे चल रही थी, लेकिन डॉक्टर्स ने कहा उसका बचना मुश्किल है। अभी इलाज चल रहा है।''
अक्टूबर 2018 में होनी है शादी- जोड़ रहा था पैसे
- चचेरे भाई के मुताबिक, ''अरविंद के तीन भाई है, जिसमें यह सबसे बड़ा है। अक्टूबर 2018 में इसकी शादी होनी है।''
- ''दिवाली पर घर भी नहीं गया था, परिवारवालों से कहा कि पैसे इकट्ठे कर अब सीधे नेक्स्ट इयर आऊंगा। घरवालों को हादसे की कोई सूचना नहीं है।''
- ''एनटीपीसी में हम लोगों को 10 हजार रूपए मिलता है। जिसमें से 5 हजार उसके पिता के इलाज पर खर्च हो जाते हैं।''
90% जला है अमृत-पीछे बड़ा परिवार
- ''दिवाली पर घर भी नहीं गया था, परिवारवालों से कहा कि पैसे इकट्ठे कर अब सीधे नेक्स्ट इयर आऊंगा। घरवालों को हादसे की कोई सूचना नहीं है।''
- ''एनटीपीसी में हम लोगों को 10 हजार रूपए मिलता है। जिसमें से 5 हजार उसके पिता के इलाज पर खर्च हो जाते हैं।''
90% जला है अमृत-पीछे बड़ा परिवार
- वहीं, 90 फीसदी जला अमृत पत्नी सुशीला के साथ हॉस्पिटल पहुंचा। पत्नी ने बताया, ''4 बच्चों में 3 बेटियां हैं। बड़ी बेटी शादी लायक हो गई है।''
- ''पति की कमाई से ही घर का खर्च चलता था। अब सब कैसे होगा कुछ समझ नहीं आ रहा है।''
थर्ड क्लास क्वालिटी के मिलते हैं सेफ्टी मटेरियल
- ''पति की कमाई से ही घर का खर्च चलता था। अब सब कैसे होगा कुछ समझ नहीं आ रहा है।''
थर्ड क्लास क्वालिटी के मिलते हैं सेफ्टी मटेरियल
- घायलों के साथ दो अन्य वर्कर दिलीप और सुनील भी पहुंचे। उन्होंने बताया, ''अभी भी बॉयलर बनने का कम चल रहा था, लेकिन उसे चालू कर दिया गया।''
- ''बॉयलर फटते ही आस-पास काम कर रहे 5 से 6 मजदूर तुरंत ही मर गए। हम भी थोड़ी दूर पर काम कर रहे थे। घायलों को बाहर निकालने का काम शुरू हुआ।''
- ''कंपनी की तरफ से हमें सेफ्टी के लिए हेलमेट, ग्लव्स, शूज और बेल्ट मिलती है, लेकिन सब थर्ड क्लास क्वालिटी का होता है।''
- ''बॉयलर फटते ही आस-पास काम कर रहे 5 से 6 मजदूर तुरंत ही मर गए। हम भी थोड़ी दूर पर काम कर रहे थे। घायलों को बाहर निकालने का काम शुरू हुआ।''
- ''कंपनी की तरफ से हमें सेफ्टी के लिए हेलमेट, ग्लव्स, शूज और बेल्ट मिलती है, लेकिन सब थर्ड क्लास क्वालिटी का होता है।''



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